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अगर फूल-काँटे में फरक हम समझते/ तारा सिंह

विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से

रचनाकार: तारा सिंह

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अगर फूल -काँटे में फरक हम समझते
बेवफा तुमसे मुहब्बत न हम करते
जो मालूम होता अन्जामे - उल्फत
यूँ उल्फत से गले न हम लगते
बहुत दे चुके हैं इन्तहाएं मुहब्बत
न होती मजबूरियाँ , शिकायत न हम करते
अगर होता मुमकिन तुम्हें भूल जाना
खुदा की कसम मुहब्बते- खत न हम लिखते


जो मालूम होता ,मुहब्बते बर्वादी में तुम भी हो
शामिल , तो एहदे मुहब्बत न हम करते