अजीब सानेहा मुझ पर गुजर गया यारो / शहरयार
From Hindi Literature
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रचनाकार: शहरयार | |
अजीब सानेहा मुझ पर गुजर गया यारो
मैं अपने साए से कल रात डर गया यारो
हर एक नक्श तमन्ना का हो गया धुंधला
हर एक ज़ख्म मेरे दिल का भर गया यारो
भटक रही थी जो कश्ती वो ग़र्क-ए-आब हुई
चढ़ा हुआ था जो दिरया उतर गया यारो
वो कौन था वो कहां का था क्या हुआ था उसे
सुना है आज कोई शख्स मर गया यारो
