Fandom

Hindi Literature

अविद्या-माया / सूरदास

१२,२६२pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share
http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER


बिनती सुनौ दीन की चित्त दै, कैसें तुव गुन गावै ?

माय नटी लकुटी कर लीन्हें कोटिक नाच नचावै ।

दर-दर लोभ लागि लिये डोलति, नाना स्वाँग बनावै ।

तुम सौं कपट करावति प्रभु जू, मेरी बुधि भरमावै ।

मन अभिलाश-तरंगनि करि करि, मिथ्या विसा जगावै ।

सोवत सपने मैं ज्यौं संपति, त्यौ दिखाइ बौरावै ।

महा मोहनी मोहि आतमा, अपमारगहिं लगावै ।

ज्यौं दूती पर-बधू भोरि कै, लै पर-पुरुष दिखावै ।

मेरे तो तुम पति , तुमहिं गति, तुम समान को पावै ?

सूरदास प्रभु तुम्हरी कृपा बिनु, को मो दुख बिसरावै ॥1॥


हरि, तेरो भजन कियौ न जाइ ।

कह करौं, तेरी प्रबल माया देति मन भरमाइ ।

जबै आवौं साधु-संगति, कछुक मन ठहराइ ।

ज्यौं गयंद अन्हाइ सरिता, बहुरि वहै सुभाइ ।

बेष धरि धरि हर्‌यौ पर-धन, साधु-साधु कहाइ ।

जैसे नटवा लोभ -कारन करत स्वाँग बनाइ ।

करौं जतन, न भजौं तुमकों, कछुक मन उपजाई ।

सूर प्रभु की सबल माया. देति मोहि भुलाइ ॥2॥

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on Fandom

Random Wiki