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आंचल भर लो / चंद्र कुमार जैन

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रचनाकार: चंद्र कुमार जैन

~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~

छोड़ो अब सपनों की बातें
बीत गई नींदों की रातें
याद रखो पर -
नींदों को नीलाम नहीं करना है
सपनों को बदनाम नहीं करना है !

बीते पल की धूमिल बातें
अब बिसराओ मेरे साथी,
सूरज अभिनंदन करता है
गले लगाओ मेरे साथी !

यदि बीते से प्रेम अधिक है
याद भाहीदों की तुम कर लो,
दे ा प्रेम की रजत रि म से
अपना अपना आंचल भर लो !

साँसों की सरगम ही
जीवन की पहचान नहीं है,
जीवन कर्मश्रेत्र है साथी
कोरा गान नहीं है !

मौत मारती है उनको ही
जो कायर दिल के होते हैं,
वीर नींद में भी जागते हैं
कायर जग कर भी सोते हैं !

आओ अब आपस में मिलकर
नव युग की कुछ बातें कर लो,
प्रेम की रजत रिमझिम से
अपना - अपना आंचल भर लो !

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