FANDOM

१२,२६२ Pages

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng
































CHANDER

 राग बिलावल

आजु गृह नंद महर कैं बधाइ ।
प्रात समय मोहन मुख निरखत, कोटि चंद-छबि पाइ ॥
मिलि ब्रज-नागरि मंगल गावतिं, नंद-भवन मैं आइ ।
देतिं असीस, जियौ जसुदा-सुत कोटिनि बरष कन्हाइ ॥
अति आनंद बढ्यौ गोकुल मैं, उपमा कही न जाइ ।
सूरदास धनि नँद की घरनी, देखत नैन सिराइ ॥

आज व्रजराज श्रीनन्द जी के यहाँ बधाई बज रही है । करोड़ों चन्द्रमा के समान सुशोभित मोहन का मुख प्रातःकाल ही उन्होंने देखा है । व्रज-नागरिकाएँ एकत्र होकर नन्दभवन में आकर मंगलगान कर रही हैं । वे आशीर्वाद देती हैं--`यशोदा रानी का पुत्र कन्हाई करोड़ों वर्ष जीवे ।' गोकुल में अत्यन्त आनन्द उमड़ा है, उसकी उपमा वर्णन नहीं किया जा सकता । सूरदास जी कहते हैं कि नन्दपत्नी धन्य हैं, उनके दर्शन करके ही नेत्र शीतल हो जाते हैं ।

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on FANDOM

Random Wiki