पुराने अवतरण Report a problem
पन्ना बदलें संवाद

आज मेरे नयन के तारक हुए जलजात देखो! / महादेवी वर्मा

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे!   दो वर्ष की उपलब्धियाँ    |     रचनाकारों की टिप्पणियाँ    |     अपनी टिप्पणी दीजिये


 रचनाकार: महादेवी वर्मा                 

 संग्रह का मुखपृष्ठ: सांध्यगीत / महादेवी वर्मा

आज मेरे नयन के तारक हुए जलजात देखो!

अलस नभ के पलक गीले,
कुन्तलों से पोंछ आई;
सघन बादल भी प्रलय के
श्वास से मैं बाँध लाई;

पर न हो निस्पन्दता में चंचला भी स्नात देखो!

मूक प्राणायाम में लय-
हो गई कम्पन अनिल की;
एक अचल समाधि में थक,
सो गई पलकें सलिल की;

प्रात की छवि ले चली आई नशीली रात देखो!

आज बेसुध रोम रोमों-
में हुई वह चेतना भी;
मर्च्छिता है एक प्रहरी सी
सजग चिर वेदना भी;

रश्मि से हौले जाओ न हो उत्पात देखो!

एक सुधि-सम्बल तुम्हीं से,
प्राण मेरा माँग लाया;
तोल करती रात जिसका,
मोल करता प्रात आया;

दे बहा इसको न करुणा की कहीं बरसात देखो!

एकरस तम से भरा है,
एक मेरा शून्य आँगन;
एक ही निष्कम्प दीपक-
से दुकेला ही रहा मन;

आज निज पदचाप की भेजो न झंझावात देखो!

Rate this article:

Share this article:

Hubs Highlights International Sites Wikia messages
Entertainment
Gaming
Cartoons & Comics
Science Fiction
Hobbies
Sports
See all...
German
Spanish
Chinese
Japanese
More...
Wikia is hiring for several open positions
Send this article to a friend
"आज मेरे नयन के तारक हुए जलजात देखो! / महादेवी वर्मा"
 
 
Hi!

I thought you'd like this page from Wikia!

http://hi.literature.wikia.com

Come check it out!
Send confirmation


.