इसे गुनाह कहें या कहें सवाब का काम / शहरयार
From Hindi Literature
|
कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे! दो वर्ष की उपलब्धियाँ | रचनाकारों की टिप्पणियाँ | अपनी टिप्पणी दीजिये
|
|
रचनाकार: शहरयार | |
इसे गुनाह कहें या कहें सवाब का काम
नदी को सौंप दिया प्यास ने सराब का काम
हम एक चेहरे को हर जाविए से देख सकें
किसी तरह से मुकम्मल हो नक्शे-आब का काम
हमारी आँखे कि पहले तो खूब जागती हैं
फिर उसके बाद वो करतीं है सिर्फ ख्वाब का काम
वो रात कश्ती किनारे लगी कि डूब गई
सितारे निकले तो थे करने माहताब का काम
फरेब खुद को दिए जा रहे हैं और खुश हैं
उसे खबर है कि दुश्वार है हिजाब का काम
सराब = मरीचिका
जाविए = कोण
नक्शे-आब = जल्दी मिट जाने वाला निशान
हिजाब = पर्दा
