FANDOM

१२,२६२ Pages

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng
































CHANDER

मुखपृष्ठ: पद्मावत / मलिक मोहम्मद जायसी

मैं एहि अरथ पंडितन्ह बूझा । कहा कि हम्ह किछु और न सूझा ॥
चौदह भुवन जो तर उपराहीं । ते सब मानुष के घट माहीं ॥
तन चितउर, मन राजा कीन्हा । हिय सिंघल, बुधि पदमिनि चीन्हा ॥
गुरू सुआ जेइ पंथ देखावा । बिनु गुरु जगत को निरगुन पावा ?॥
नागमती यह दुनिया-धंधा । बाँचा सोइ न एहि चित बंधा ॥
राघव दूत सोई सैतानू । माया अलाउदीं सुलतानू ॥
प्रेम-कथा एहि भाँति बिचारहु । बूझि लेहु जौ बूझै पारहु ॥

तुरकी, अरबी, हिंदुई, भाषा जती आहिं ।
जेहि महँ मारग प्रेम कर सबै सराहैं ताहि ॥1॥

मुहमद कबि यह जोरि सुनावा । सुना सो पीर प्रेम कर पावा ॥
जोरी लाइ रकत कै लेई । गाढि प्रीति नयनन्ह जल भेई ॥
औ मैं जानि गीत अस कीन्हा । मकु यह रहै जगत महँ चीन्हा ॥
कहाँ सो रतनसेन अब राजा ?। कहाँ सुआ अस बुधि उपराजा ?॥
कहाँ अलाउदीन सुलतानू ?। कहँ राघव जेइ कीन्ह बखानू ?॥
कहँ सुरूप पदमावति रानी?। कोइ न रहा, जग रही कहानी ॥
धनि सोई जस कीरति जासू । फूल मरै, पै मरै न बासू ॥

केइ न जगत बेंचा, कइ न लीन्ह जस मोल ?
जो यह पढै कहानी हम्ह सँवरै दुइ बोल ॥2॥

मुहमद बिरिध बैस जो भई । जोबन हुत, सो अवस्था गई ॥
बल जो गएउ कै खीन सरीरू । दीस्टि गई नैनहिं देइ नीरू ॥
दसन गए कै पचा कपोला । बैन गए अनरुच देइ बोला ॥
बुधि जो गई देई हिय बोराई । गरब गएउ तरहुँत सिर नाई ॥
सरवन गए ऊँच जो सुना । स्याही गई, सीस भा धुना ॥
भवँर गए केसहि देइ भूवा । जोबन गएउ जीति लेइ जूवा ॥
जौ लहि जीवन जोबन-साथा । पुनि सो मीचु पराए हाथा ॥

बिरिध जो सीस डोलावै, सीस धुनै तेहि रीस ।
बूढी आऊ होहु तुम्ह, केइ यह दीन्ह असीस ? ॥3॥


(1) एहि = इसका । पंडितन्ह = पंडितों से । कहा...सूझा =उन्होंने कहा, हमे तो सिवा इसके और कुछ नहीं सूझता है कि । ऊपराहीं = ऊपर । निरगुन = ब्रह्म, ईश्वर ।

(2) जोरी लाइ .....भेई = इस कविता को मैंने रक्त की लेई लगा कर जोडा है और गाढी प्रीति को आँसुओं से भिगो-भिगोकर गीला किया है । चीन्हा = चिह्न, निशान । उपराजा = उत्पन्न किया । अब बुधि उपराजा = जिसने राजा रत्नसेन के मन में ऐसी बुद्धि उत्पन्न की । केइ न जगत जस बेचा = किसने इस संसार में थोडे के लिये अपना यश नहीं खोया? अर्थात् ऐसे बहुत से लोग ऐसे हैं । हम्ह सँवरे = हमें याद करेगा । दुइ बोल = दो शब्दों में।

(3) पचा = पिचका हुआ । अनरुच = अरुचिकर । बोराई = बावलापन । तरहुँत = नीचे की ओर । धुना = धुनी रूई । भुवा = काँस के फूल । जौ लहि हाथा = कवि कहता है कि जबतक जिंदगी रहे जवानी के साथ रहे, फिर जब दूसरे का आश्रित होना पडे तब तो मरना ही अच्छा है । रीस = रिस या क्रोध से । केइ.....असीस किसने व्यर्थ ऐसा आशीर्वाद दिया ?

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on FANDOM

Random Wiki