उल्फ़त का जब किसी ने / सुदर्शन फ़ाकिर
From Hindi Literature
| रचना संदर्भ | रचनाकार: | सुदर्शन फ़ाकिर | |
| पुस्तक: | प्रकाशक: | ||
| वर्ष: | पृष्ठ संख्या: | ||
उल्फ़त का जब किसी ने लिया नाम रो पड़े
अपनी वफ़ा का सोच के अंजाम रो पड़े
हर शाम ये सवाल मुहब्बत से क्या मिला
हर शाम ये जवाब के हर शाम रो पड़े
राह-ए-वफ़ा में हमको ख़ुशी की तलाश थी
दो गाम ही चले थे के हर गाम रो पड़े
रोना नसीब में है तो औरों से क्या गिला
अपने ही सर लिया कोई इल्ज़ाम रो पड़े
