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CHANDER

उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है
जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है

नई उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौनअब तो अँगारों के लब चूम के सो जाएँगे हम वो प्यासे हैं जो दरियाओं को तरसाएँगे ख़्वाब आईने हैं आँखों में लिए फिरते हो धूप में चमकेंगे टूटेंगे तो चुभ जाएँगे सुब्ह तक दिल के दरीचों को खुला रहने दो दर्द गुमराह फ़रिश्ते हैं कहाँ जाएँगे नींद की फ़ाख़्ता सहमी हुई है आँखों में तीर यादों की कमीं-गाहों से फिर आएँगे समझाये
कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है

थके हारे परिन्दे जब बसेरे के लिये लौटे
सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है

बहुत बेबाक आँखों में त'अल्लुक़ टिक नहीं पाता
मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है<अब तो अँगारों के लब चूम के सो जाएँगे हम वो प्यासे हैं जो दरियाओं को तरसाएँगे ख़्वाब आईने हैं आँखों में लिए फिरते हो धूप में चमकेंगे टूटेंगे तो चुभ जाएँगे सुब्ह तक दिल के दरीचों को खुला रहने दो दर्द गुमराह फ़रिश्ते हैं कहाँ जाएँगे

नींद की फ़ाख़्ता सहमी हुई है आँखों में तीर यादों की कमीं-गाहों से फिर आएँगे br>

सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का
जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है

मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो
कि इस के बाद भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है