एक यात्रा के दौरान / दो / कुंवर नारायण
From Hindi Literature
कवि: कुंवर नारायण
~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~
सुबह चार बजे मुझे एक ट्रेन पकड़ना है।
मुझे एक यात्रा पर जाना है।
मुझे काम पर जाना है।
मुझे कहाँ जाना है
दशरथ की पत्नियों के प्रपंच से बच कर ?
मुझ तरह तरह के कामों के पीछे
कहाँ कहाँ जाना है ?
कहाँ नहीं जाना है ?
