Fandom

Hindi Literature

एक साग़र भी इनायत न हुआ याद रहे / बृज नारायण चकबस्त

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

रचनाकार: बृज नारायण चकबस्त

~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*

एक साग़र भी इनायत न हुआ याद रहे ।

साक़िया जाते हैं, महफ़िल तेरी आबाद रहे ।।


बाग़बाँ दिल से वतन को यह दुआ देता है,

मैं रहूँ या न रहूँ यह चमन आबाद रहे ।


मुझको मिल जाय चहकने के लिए शाख़ मेरी,

कौन कहता है कि गुलशन में न सय्याद रहे ।


बाग़ में लेके जनम हमने असीरी झेली,

हमसे अच्छे रहे जंगल में जो आज़ाद रहे ।

Also on Fandom

Random Wiki