Recent changes Random page
GAMING
Entertainment
 
Star Wars
Star Trek
Transformers
Muppet Wiki
Digimon Wiki
Marvel Database
See more...

ओस के संवेद्य मौनाकाश में हो / केदारनाथ अग्रवाल

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज
 

 रचनाकार: केदारनाथ अग्रवाल                 

 संग्रह का मुखपृष्ठ: फूल नहीं, रंग बोलते हैं-1 / केदारनाथ अग्रवाल

ओस के संवेद्य मौनाकाश में ही

या सुगन्धों की सुखावह साँस में ही,

हो न हो यह ज़िन्दगी मेरी

कहीं अटकी हुई है ।

छोड़ता हूँ--छोड़ती मुझ को नहीं

तलवार मेरी ।

बह रही है धार मेरी

उठ रही ललकार मेरी ।
Rate this article:
Share this article: