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ओ री चिड़िया / कृष्ण शलभ

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 रचनाकार: कृष्ण शलभ                 

जहाँ कहूँ मैं बोल बता दे

क्या जाएगी, ओ री चिड़िया

उड़ करके क्या चन्दा के घर

हो आएगी, ओ री चिड़िया।



चन्दा मामा के घर जाना

वहाँ पूछ कर इतना आना

आ करके सच-सच बतलाना

कब होगा धरती पर आना

कब जाएगी, बोल लौट कर

कब आएगी, ओ री चिड़िया

उड़ करके क्या चन्दा के घर

हो आएगी, ओ री चिड़िया।



पास देख सूरज के जाना

जा कर कुछ थोड़ा सुस्ताना

दुबकी रहती धूप रात-भर

कहाँ? पूछना, मत घबराना

सूरज से किरणों का बटुआ

कब लाएगी, ओ री चिड़िया

उड़ करके क्या चन्दा के घर

हो आएगी, ओ री चिड़िया।



चुन-चुन-चुन-चुन गाते गाना

पास बादलों के हो आना

हाँ, इतना पानी ले आना

उग जाए खेतों में दाना

उगा न दाना, बोल बता फिर

क्या खाएगी, ओ री चिड़िया

उड़ करके क्या चन्दा के घर

हो आएगी, ओ री चिड़िया।

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