Fandom

Hindi Literature

कनक-रतन-मनि पालनौ, गढ़्यौ काम सुतहार / सूरदास

१२,२६२pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share
http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

राग जैतश्री

कनक-रतन-मनि पालनौ, गढ़्यौ काम सुतहार ।
बिबिध खिलौना भाँति के (बहु) जग-मुक्ता चहुँधार ॥
जननि उबटि न्हवाइ कै (सिसु) क्रम सौं लीन्है गोद ।
पौढ़ाए पट पालनैं (हँसि) निरखि जननि मन-मोद ॥
अति कोमल दिन सात के (हो) अधर चरन कर लाल ।
सूर स्याम छबि अरुनता (हो) निरखि हरष ब्रज-बाल ॥

भावार्थ :-- बढ़ई ने रत्न तथा मणियों से जड़ा पलना बड़ी कारीगरी करके बनाया है । उसमे अनेक भाँति के खिलौने लटक रहे हैं और चारों ओर जगमुक्ता की लड़ियाँ लगी हैं । माता ने उबटन लगाकर, स्नान कराके धीरे से शिशु को गोद में उठाया और पलने में सुलाकर वस्त्र ऊपर डाला, फिर हँसकर (पुत्र को ) देखकर माता के मन में बड़ा आनन्द हुआ । अभी अत्यन्त कोमल हैं, केवल सात दिन के हैं, अधर, चरन तथा कर लाल-लाल हैं, सूरदास जी कहते हैं--श्यामसुन्दर की अरुणिम छटा देखकर व्रज की नारियाँ हर्षित हो रही हैं ।

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on Fandom

Random Wiki