Fandom

Hindi Literature

कन्हैया हालरौ हलरोइ / सूरदास

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

राग जैतश्री

कन्हैया हालरौ हलरोइ ।
हौं वारी तव इंदु-बदन पर, अति छबि अलग भरोइ ॥
कमल-नयन कौं कपट किए माई, इहिं ब्रज आवै जोइ ।
पालागौं बिधि ताहि बकी ज्यौं, तू तिहिं तुरत बिगोइ ॥
सुनि देवता बड़े, जग-पावन, तू पति या कुल कोइ ।
पद पूजिहौं, बेगि यह बालक करि दै मोहिं बड़ोइ ॥
दुतियाके ससि लौं बाढ़े सिसु, देखै जननि जसोइ ॥
यह सुख सूरदास कैं नैननि, दिन-दिन दूनौ हो ॥

भावार्थ :-- (माता गा रही हैं) `कन्हैया! पलने में झूल! मैं तेरे इस चन्द्रमुख की बलिहारी जाऊँ जो अपार शोभा से अलग ही (अद्भुत रूप से) परिपूर्ण है । `माई री!' (पूतना का स्मरण करके यह उद्गार करके तब प्रार्थना करती हैं-) दैव! मैं तेरे पैरौं पड़ती हूँ, इस कमललोचन से छल करने इस व्रज में जो कोई आवे,उसे तू उस पूतना के समान ही तुरन्त नष्ट कर देना । सुना है तू महान् देवता है, संसार को पवित्र करने वाला है, इस कुल का स्वामी है, सो मैं तेरे चरणों की पूजा करूँगी, मेरे इस बालक को झटपट बड़ा कर दे । मेरा शिशु द्वितीया के चन्द्रमा की भाँति बढ़े और यह माता यशोदा उसे देखे ।' सूरदास जी कहते हैं -मेरे नेत्रों के लिये भी यह सुख दिनों-दिन दुगुना बढ़ता रहे ।

Also on Fandom

Random Wiki