कला-दर्शन / असद ज़ैदी
From Hindi Literature
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रचनाकार: असद ज़ैदी | |
एक
सरोज के लिए योग्य वर खोजना आसान नहीं था
ब्राह्मणत्व की आग से भयंकर थी कविता की आग
अन्त में कवि अमर हो जाता है एक पिता रोता पीटता
मर खप जाता है
दो
