Fandom

Hindi Literature

कहन लागीं अब बढ़ि-बढ़ि बात / सूरदास

१२,२६२pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share
http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

राग कल्याण

कहन लागीं अब बढ़ि-बढ़ि बात ।
ढोटा मेरौ तुमहिं बँधायौ तनकहि माखन खात ॥
अब मोहि माखन देतिं मँगाए, मेरैं घर कछु नाहिं !
उरहन कहि-कहि साँझ-सबारैं, तुमहिं बँधायौ याहि ॥
रिसही मैं मोकौं गहि दीन्हौ, अब लागीं पछितान ।
सूरदास अब कहति जसोदा बूझ्यौ सब कौ ज्ञान ॥


भावार्थ :-- (यशोदा जी ने गोपियों को डाँटा-) `अब तुम सब बढ़-बढ़कर बातें कहने लगी हो । तुम्हीं सबों ने तो तनिक-सा मक्खन खाने के कारण मेरे पुत्र को बँधवाया है । अब मुझे (अपने घरों से) मक्खन मँगाकर दे रही हो, जैसे मेरे घर कुछ है ही नहीं । बार बार प्रातः-सायं (हर समय) उलाहना दे-देकर तुम्हीं (सबों) ने तो इसे बँधवाया है । क्रोध में ही इसे पकड़कर तो मुझे दे दिया और अब पश्चाताप करने लगी हो ।' सूरदास जी कहते हैं कि यशोदा जी ने कहा-` अब तुम सबकी समझदारी मैं समझ गयी ।'

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on Fandom

Random Wiki