Recent changes Random page
GAMING
Entertainment
 
Star Wars
Star Trek
Transformers
Muppet Wiki
Digimon Wiki
Marvel Database
See more...

काश / दिविक रमेश

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

 रचनाकार: दिविक रमेश                 

काश कि मैं एक नागरिक न होता
दबा
सभ्य होने के बोझ से
तो न करता इन्तज़ार
किसी गवाही
किसी अदालत की।

उखाड़ फेंकता जहरीले वृक्षों को
कर डालता शिकार वर्जित क्षेत्र में भी
वहशी प्राणियों का
नहीं करता परवाह मंत्रालयों की,
विभागों की।

काश कि मैं पिशाचभक्षी हो पाता
तो खाता एक एक अंग
जिंदा ही भूनकर उनका
और अट्टहास करता
उनके गगनभेदी चीत्कारों पर।

देखता पूरी खिंची आँखों से।
नोचता उनकी स्मृतियों को।

कैसे चबाया होगा उन्होंने
मासूम बच्चों और महिलाओं के गोश्त को!
कैसे किया होगा उपेक्षित
उनकी आँखे से टपकती मानवता को!

कैसे ?
काश !

नोटः निठारी, नोएडा के कांड से प्रेरित होकर।

Rate this article:
Share this article: