Fandom

Hindi Literature

कीर का प्रिय आज पिंजर खोल दो! / महादेवी वर्मा

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

कीर का प्रिय आज पिंजर खोल दो!

हो उठी है चंचु छूकर,
तीलियाँ भी वेणु सस्वर;
बन्दिनी स्पन्दित व्यथा ले,
सिहरता जड़ मौन पिंजर!

आज जड़ता में इसी की बोल दो!

जग पड़ा छू अश्रु-धारा;
हत परों का विभव सारा
अब अलस बन्दी युगों का-
ले उड़ेगा शिथिल कारा!

पङ्ख पर वे सजल सपने तोल दो!

क्या तिमिर कैसी निशा है!
आज विदिशा ही दिशा है;
दूर-खग आ निकटता के
अमर बन्धन में बसा है!

प्रलय घन में आज राका घोल दो!

चपल पारद सा विकल तन,
सजल नीरद सा भरा मन,
नाप नीलकाश ले जो-
बेडियों का माप यह बन,
एक किरण अनन्त दिन की मोल दो!

Also on Fandom

Random Wiki