Fandom

Hindi Literature

खेलत स्याम ग्वालनि संग / सूरदास

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share
http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

राग रामकली

खेलत स्याम ग्वालनि संग ।
सुबल हलधर अरु श्रीदामा, करत नाना रंग ॥
हाथ तारी देत भाजत, सबै करि करि होड़ ।
बरजै हलधर ! तुम जनि, चोट लागै गोड़ ॥
तब कह्यौ मैं दौरि जानत, बहुत बल मो गात ।
मेरी जोरी है श्रीदामा, हाथ मारे जात ॥
उठे बोलि तबै श्रीदामा, जाहु तारी मारि ।
आगैं हरि पाछैं श्रीदामा, धर्‌यौ स्याम हँकारि ॥
जानि कै मैं रह्यो ठाढ़ौ छुवत कहा जु मोहि ।
सूर हरि खीझत सखा सौं, मनहिं कीन्हौ कोह ॥


भावार्थ ;-- श्यामसुन्दर गोपकुमारों के साथ खेल रहे हैं । सुबल, बलराम जी और श्रीदामा आदि नाना प्रकार की क्रीड़ा कर रहे हैं । सब परस्पर होड़ करके एक-दूसरे के हाथ पर ताली मारकर भागते हैं । लेकिन श्रीबलराम मना करते हैं कि `श्यामसुन्दर ! तुम मत दौड़ो । तुम्हारे पैरों में चोट न लगे ।' तब मोहन ने कहा `मैं दौड़ना जानता हूँ । मेरे शरीर में बहुत बल है । मेरी जोड़ी श्रीदामा है, वह मेरे हाथ पर ताली मारकर भागना चाहता है ।' तब श्रीदामा बोल उठे -`(अच्छा) तुम मेरे हाथ पर ताली मारकर भागो ।'(इस प्रकार श्रीदामा के हाथ पर ताली मार कर ) श्यामसुन्दर आगे-आगे दौड़े ( और उन्हें पकड़ने) पीछे-पीछे श्रीदामा दौड़े । उन्होंने ललकारकर श्याम को पकड़ लिया । (तब श्यामसुन्दर बोले-) `मैं तो जान-बूझकर खड़ा हो गया हूँ, (ऐसी दशा में) मुझे क्यों छूते हो ।' सूरदास जी कहते हैं कि अपने मन में रोष करके श्यामसुन्दर अब सखा से झगड़ रहे हैं ।

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on Fandom

Random Wiki