गीत-2 / केदारनाथ अग्रवाल
From Hindi Literature
|
रचनाकार: केदारनाथ अग्रवाल | |
|
संग्रह का मुखपृष्ठ: फूल नहीं, रंग बोलते हैं-1 / केदारनाथ अग्रवाल |
धीरे उठाओ मेरी पालकी
मैं हूँ सुहागिन गोपाल की
बेला है फूलों के माल की
फूलों के माल की--
- धीरे उठाओ मेरी पालकी ।
धीरे उठाओ मेरी पालकी
मैं हूँ बँसुरिया गोपाल की
बेला है गीतों के ताल की
गीतों के ताल की--
- धीरे उठाओ मेरी पालकी ।
धीरे उठाओ मेरी पालकी
मैं हूँ सुरतिया गोपाल की
बेला है मनसिज के ज्वाल की
मनसिज के ज्वाल की--
- धीरे उठाओ मेरी पालकी ।
