Fandom

Hindi Literature

गुनगुन करने लगे हैं दिन / शांति सुमन

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

लेखिका: शांति सुमन

~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*

चिट्ठी की पांती से खुलने लगे हैं दिन,

सर्दियाँ होने लगी हैं और कुछ कमसिन ।


दोहे जैसी सुबहें

रुबाई लिखी दुपहरी,

हवा खिली टहनी-सी

खिड़की के कंधे ठहरी,


चमक पुतलियों में फिर भरने लगे हैं दिन,

नीले कुहासे टंके हुए आंचल पर पिन ।


कत्थई गेंदे की

खुशबू से भींगी रातें,

हल्का मादल जैसे

लगी सपन को पांखें,


ऋतु को फिर गुनगुने करने लगे हैं दिन,

उजाले छौने जैसे रखते पाँव गिन-गिन ।


सूत से लपेट धूप को

सहेजकर जेबों में,

मछली बिछिया बजती

पोखर के पाजेबों में,


हाथ में हल्दी-सगुन करने लगे हैं दिन,

सांझ जलती आरती-सी हुई तेरे बिन ।

Also on Fandom

Random Wiki