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गुलाबों की तरह दिल अपना / बशीर बद्र

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज
 

रचनाकार: बशीर बद्र

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गुलाबों की तरह दिल अपना शबनम में भिगोते हैं
मोहब्बत करने वाले खूबसूरत लोग होते हैं

किसी ने जिस तरह अपने सितारों को सजाया है
ग़ज़ल के रेशमी धागे में यूँ मोती पिरोते हैं

पुराने मौसमों के नामे-नामी मिटते जाते हैं
कहीं पानी, कहीं शबनम, कहीं आँसू भिगोते हैं

यही अंदाज़ है मेरा समन्दर फ़तह करने का
मेरी काग़ज़ की कश्ती में कई जुगनू भी होते हैं

सुना है बद्र साहब महफ़िलों की जान होते थे
बहुत दिन से वे पत्थर हैं, न हँसते हैं न रोते हैं

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