Fandom

Hindi Literature

चमन में सुबह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम / ख़्वाजा मीर दर्द

१२,२६२pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share
http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

चमन में सुबह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम|
बहार-ए-बाग़ तो यूं ही रही लेकिन किधर शबनम|

अर्क की बूंद उस की ज़ुल्फ़ से रुख़सार पर टपकी,
ताज्जुब की है जागे ये पड़ी ख़ुशीर्द पर शबनम|

हमें तो बाग़ तुझ बिन ख़ाना-ए-मातम नज़र आया,
इधर गुल फारते थे जेब, रोती थी उधर शबनम|

करे है कुछ न कुछ तासीर सोहबत साफ़ ताबों की,
हुई आतिश से गुल के बैठते रश्क-ए-शरर शबनम|

भला तुक सुबह होने दो इसे भी देख लेवेंगे,
किसी आशिक़ के रोने से नहीं रखती ख़बर शबनम|

नहीं अस्बाब कुछ लाजि़म सुबक सारों के उठने को,
गई उड़ देखते अपने बग़ैर अज़ बाल- ओ-पर शबनम|

न पाया जो गया इस बाग़ से हरिगज़ सुराग़ उसका,
न पल्टी फिर सबा इधर, न फिर आई नज़र शबनम|

न समझा ‘दर्द’ हमने भेद यां की शादी-ओ-ग़म का,
सहर खन्दान है क्यों रोती है किस को याद कर शबनम|

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on Fandom

Random Wiki