चार और पंक्तियाँ / प्रभाकर माचवे
From Hindi Literature
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रचनाकार: प्रभाकर माचवे | |
जब दिल ने दिल को जान लिया
जब अपना-सा सब मान लिया
तब ग़ैर-बिराना कौन बचा
यदि बचा सिर्फ़ तो मौन बचा !
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रचनाकार: प्रभाकर माचवे | |
जब दिल ने दिल को जान लिया
जब अपना-सा सब मान लिया
तब ग़ैर-बिराना कौन बचा
यदि बचा सिर्फ़ तो मौन बचा !