पुराने अवतरण Report a problem
पन्ना बदलें संवाद

छाया मत छूना / गिरिजाकुमार माथुर

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे!   दो वर्ष की उपलब्धियाँ    |     रचनाकारों की टिप्पणियाँ    |     अपनी टिप्पणी दीजिये


 रचनाकार: गिरिजाकुमार माथुर                 

छाया मत छूना

मन, होता है दुख दूना।

जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी

छवियों की चित्र-गंध फैली मनभावनी;

तन-सुगंध शेष रही, बीत गई यामिनी,

कुंतल के फूलों की याद बनी चाँदनी।

भूली-सी एक छुअन बनता हर जीवित क्षण-

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

यश है या न वैभव है, मान है या न सरमाया;

जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया।

प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्‍णा है,

हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्‍णा है।

जो है यथार्थ कठिन उसका तू कर पूजन-

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

दुविधा-हत साहस है, दिखता है पंख नहीं,

देह सुखी हो पर मन के दुख का अंत नहीं।

दुख है न चाँद खिला शरद-रात आने पर,

क्‍या हुया जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?

जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्‍य वरण,

छाया मत छूना

मन, होगा दुख दूना।

Rate this article:

Share this article:

Hubs Highlights International Sites Wikia messages
Entertainment
Gaming
Cartoons & Comics
Science Fiction
Hobbies
Sports
See all...
German
Spanish
Chinese
Japanese
More...
Wikia is hiring for several open positions
Send this article to a friend
"छाया मत छूना / गिरिजाकुमार माथुर"
 
 
Hi!

I thought you'd like this page from Wikia!

http://hi.literature.wikia.com

Come check it out!
Send confirmation


.