FANDOM

१२,२६२ Pages

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng
































CHANDER

राग बिलावल


जसुमति भाग-सुहागिनी, हरि कौं सुत जानै ।
मुख-मुख जोरि बत्यावई, सिसुताई ठानै ॥
मो निधनी कौ धन रहै, किलकत मन मोहन ।
बलिहारी छबि पर भई ऐसी बिधि जोहन ॥
लटकति बेसरि जननि की, इकटक चख लावै ।
फरकत बदन उठाइ कै, मन ही मन भावै ॥
महरि मुदित हित उर भरै, यह कहि, मैं वारी ।
नंद-सुवन के चरित पर, सूरज बलिहारी ॥

सौभाग्यशालिनी श्रीयशोदा जी श्रीहरि को अपना पुत्र समझती हैं। (वात्सल्य प्रेम करती हुई) उनके मुखसे अपना मुख सटाकर बातें करती हैं । श्यामसुन्दर लड़कपन ठान लेते हैं (हाथ से मैया की नाक पकड़ लेते हैं) (वह कहती है-) `मुझ कंगालिनी का धन यह मनमोहन किलकता (प्रसन्न) रहे । लाल! तेरे इस प्रकार देखने तथा तेरी छटापट मैं बलिहारी हूँ ।'माता की लटकती हुई बेसरि पर मोहन एकटक दृष्टि लगाये हैं, कभी होठ फड़काते हुए मुख उठाकर मन-ही-मन मुदित होते हैं । व्रजरानी यह कहकर कि `लाल' मैं तुझपर न्यौछावर हूँ, हर्षित होकर प्रेम से उठाकर हृदय से लगा लेती हैं । सूरदास श्रीनन्दनन्दन की इस शिशुलीला पर बलिहारी जाता है ।

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on FANDOM

Random Wiki