FANDOM

१२,२६२ Pages

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng
































CHANDER

राग ललित


जागिए गोपाल लाल, आनँद-निधि नंद-बाल,जसुमति कहै बार-बार, भोर भयौ प्यारे ।
नैन कमल-दल बिसाल, प्रीति-बापिका-मराल,मदन ललित बदन उपर कोटि वारि डारे ॥
उगत अरुन बिगत सर्बरी, ससांक किरन-हीन,दीपक सु मलीन, छीन-दुति समूह तारे ।
मनौ ज्ञान घन प्रकास, बीते सब भव-बिलास, आस-त्रास-तिमिर तोष-तरनि-तेज जारे ॥
बोलत खग-निकर मुखर, मधुर होइ प्रतीति सुनौ,परम प्रान-जीवन-धन मेरे तुम बारे ।
मनौ बेद बंदीजन सूत-बृंद मागध-गन,बिरद बदत जै जै जै जैति कैटभारे ॥
बिकसत कमलावती, चले प्रपुंज-चंचरीक, गुंजत कल कोमल धुनि त्यागि कंज न्यारे ।
मानौ बैराग पाइ, सकल सोक-गृह बिहाइ,प्रेम-मत्त फिरत भृत्य, गुनत गुन तिहारे ॥
सुनत बचन प्रिय रसाल, जागे अतिसय दयाल ,भागे जंजाल-जाल, दुख-कदंब टारे ।
त्यागे-भ्रम-फंद-द्वंद्व निरखि कै मुखारबिंद,सूरदास अति अनंद, मेटे मद भारे ॥


भावार्थ :-- श्रीयशोदा जी बार-बार कहती हैं--`गोपाललाल, जागो! आनन्द निधि प्यारे नन्दनन्दन! सबेरा हो गया । तुम्हारे नेत्र कमल-दल समान विशाल हैं, प्रेमरूपी काचली के ये हंस हैं, तुम्हारे सुन्दर मुख पर तो करोड़ों कामदेव न्यौछावर कर दिये । देखो, अरुणौदय हो रहा है, रात्रि बीत गयी, चन्द्रमा की किरणें क्षीण हो गयीं, दीपक अत्यन्त तेजहीन हो गये, सभी तारों का तेज घट गया; मानो ज्ञान का दृढ़ प्रकाश होने से संसार के सब भोग-विलास छूट गये, आशा और भयरूपी अन्धकार संतोषरूपी सूर्य की किरणों ने भस्म कर दिया हो । पक्षियों का समूह खुलकर मधुर स्वर में बोल रहा है, इसे विश्वास करके सुनो । मेरे लाल! तुम तो मेरे परम प्राण और जीवनधन हो । (देखो पक्षियों का स्वर ऐसा लगता है) मानो बन्दीजन वेद-पाठ करते हों, सूतवृन्द और मागधों का समूह, हे कैटभारि ! तुम्हारा सुयश गान करता है और बार-बार जय-जयकार कर रहा है । कमलों का समूह खिलने लगा है, भ्रमरों का झुंड सुन्दर कोमल स्वर से गुंजार करता कमलों को छोड़कर अलग चल पड़ा है । मानो वैराग्य पाकर समस्त शोक और घर को छोड़कर तुम्हारे सेवक तुम्हारा गुणगान करते प्रेममत्त घूम रहे हौं ।' (माता के) प्यारे रसमय वचन सुनकर अत्यन्त दयालु प्रभु जग गये । ( उनके नेत्र खोलते ही जगत के) सब जंजालों का फंदा दूर हो गया दुःखों का समूह नष्ट हो गया । सूरदास ने उनके मुखारविन्दका दर्शन करके अज्ञान के सब फंदे, सब द्वन्द्व त्याग दिये । अब मेरा भारी मद (अहंकार) प्रभु ने मिटा दिया, मुझे अत्यन्त आनन्द हो रहा है ।

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on FANDOM

Random Wiki