Quantcast जीवन, यह मौलिक महमानी / माखनलाल चतुर्वेदी - Hindi Literature
Recent changes Random page
GAMING
Entertainment
 
Star Wars
Star Trek
Transformers
Muppet Wiki
Digimon Wiki
Marvel Database
See more...

जीवन, यह मौलिक महमानी / माखनलाल चतुर्वेदी

विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

कवि: माखनलाल चतुर्वेदी

~*~*~*~*~*~*~*~


जीवन, यह मौलिक महमानी!


खट्टा, मीठा, कटुक, केसला

कितने रस, कैसी गुण-खानी

हर अनुभूति अतृप्ति-दान में

बन जाती है आँधी-पानी


कितना दे देते हो दानी

जीवन की बैठक में, कितने

भरे इरादे दायें-बायें तानें स्र्कती नहीं भले ही

मिन्नत करें कि सौहे खायें!


रागों पर चढ़ता है पानी।।

जीवन, यह मौलिक महमानी।।


ऊब उठें श्रम करते-करते

ऐसे प्रज्ञाहीन मिलेंगे

साँसों के लेते ऊबेंगे

ऐसे साहस-क्षीण मिलेगे


कैसी है यह पतित कहानी?

जीवन, यह मौलिक महमानी।।


ऐसे भी हैं, श्रम के राही

जिन पर जग-छवि मँडराती है

ऊबें यहाँ मिटा करती हैं

बलियाँ हैं, आती-जाती हैं।


अगम अछूती श्रम की रानी!

जीवन, यह मौलिक महमानी।।


-

Rate this article:
Share this article: