Fandom

Hindi Literature

तेरी महफ़िल से उठकर इश्क़ के मारों पे क्या गुज़री / शकील बँदायूनी

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

तेरी महफ़िल से उठकर इश्क़ के मारों पे क्या गुज़री
मुख़ालिफ़ इक जहाँ था जाने बेचारों पे क्या गुज़री

सहर को रुख़्सत-ए-बीमार-ए-फ़ुर्क़त देखने वालो
किसी ने ये भी देखा रात भर तारों पे क्या गुज़री

सुना है ज़िन्दगी वीरानियों ने लूट् ली मिलकर्
न जाने ज़िन्दगी के नाज़बरदारों पे क्या गुज़री

हँसी आई तो है बेकैफ़ सी लेकिन ख़ुदा जाने
मुझे मसरूर पाकर मेरे ग़मख़्वारों पे क्या गुज़री

असीर-ए-ग़म तो जाँ देकर रिहाई पा गया लेकिन
किसी को क्या ख़बर ज़िन्दाँ की दिवारों पे क्या गुज़री

Also on Fandom

Random Wiki