FANDOM

१२,२६२ Pages

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

दोनों ओर प्रेम पलता है

सखि पतंग भी जलता है हा दीपक भी जलता है


सीस हिलाकर दीपक कहता

बन्धु वृथा ही तू क्यों दहता

पर पतंग पडकर ही रहता कितनी विह्वलता है

दोनों ओर प्रेम पलता है


बचकर हाय पतंग मरे क्या

प्रणय छोडकर प्राण धरे क्या

जले नही तो मरा करें क्या क्या यह असफलता है

दोनों ओर प्रेम पलता है


कहता है पतंग मन मारे

तुम महान मैं लघु पर प्यारे

क्या न मरण भी हाथ हमारे शरण किसे छलता है

दोनों ओर प्रेम पलता है


दीपक के जलनें में आली

फिर भी है जीवन की लाली

किन्तु पतंग भाग्य लिपि काली किसका वश चलता है

दोनों ओर प्रेम पलता है


जगती वणिग्वृत्ति है रखती

उसे चाहती जिससे चखती

काम नही परिणाम निरखती मुझको ही खलता है

दोनों ओर प्रेम पलता है

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on FANDOM

Random Wiki