Fandom

Hindi Literature

नवम्बर की दोपहर / धर्मवीर भारती

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

अपने हलके-फुलके उड़ते स्पर्शों से मुझको छू जाती है

जार्जेट के पीले पल्ले-सी यह दोपहर नवम्बर की !


आयी गयी ऋतुएँ पर वर्षों से ऐसी दोपहर नहीं आयी

जो क्वाँरेपन के कच्चे छल्ले-सी

इस मन की उँगली पर

कस जाये और फिर कसी ही रहे

नितप्रति बसी ही रहे, आँखों, बातों में, गीतों में

आलिंगन में घायल फूलों की माला-सी

वक्षों के बीच कसमसी ही रहे


भीगे केशों में उलझे होंगे थके पंख

सोने के हंसों-सी धूप यह नवम्बर की

उस आँगन में भी उतरी होगी

सीपी के ढालों पर केसर की लहरों-सी

गोरे कंधों पर फिसली होगी बन आहट

गदराहट बन-बन ढली होगी अंगों में


आज इस वेला में

दर्द में मुझको

और दोपहर ने तुमको

तनिक और भी पका दिया

शायद यही तिल-तिल कर पकना रह जायेगा

साँझ हुए हंसों-सी दोपहर पाँखें फैला

नीले कोहरे की झीलों में उड़ जायेगी

यह है अनजान दूर गाँवों से आयी हुई

रेल के किनारे की पगडण्डी

कुछ क्षण संग दौड़-दौड़

अकस्मात् नीले खेतों में मुड़ जायेगी.......

Also on Fandom

Random Wiki