निर्बल का बल / मैथिलीशरण गुप्त
From Hindi Literature
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रचनाकार: मैथिलीशरण गुप्त | |
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संग्रह का मुखपृष्ठ: झंकार / मैथिलीशरण गुप्त |
निर्बल का बल राम है।
हृदय ! भय का क्या काम है।।
राम वही कि पतित-पावन जो
परम दया का धाम है,
इस भव – सागर से उद्धारक
तारक जिसका नाम है।
हृदय, भय का क्या काम है।।
तन-बल, मन-बल और किसी को
धन-बल से विश्राम है,
हमें जानकी – जीवन का बल
निशिदिन आठों याम है।
हृदय, भय का क्या काम है।।
