न गुल-ए-नग़्मा हूँ / गा़लिब
From Hindi Literature
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रचनाकार: ग़ालिब | |
न गुल-ए-नग़्मा हूँ न परदा-ए-साज़
मैं हूँ अपनी शिकस्त की आवाज़
तू और आराईश-ए-ख़म-ए-काकुल
मैं और अंदेशए-हाए-दूर-दराज़
लाफ़-ए-तमकीं फ़रेब-ए-सादा-दिली
हम हैं और राज़हाए सीना-ए-गुदाज़
हूँ गिरफ़्तार-ए-उल्फ़त-ए-सय्याद
वरना बाक़ी है ताक़त-ए-परवाज़
नहीं दिल में मेरे वह क़तरा-ए-ख़ूँ
जिस से मिश्गां हुई न हो गुलबाज़
ऐ तेरा ग़मज़ा-ए-यक क़लम अंगेज़
ऐ तेरा ज़ुल्म-ए-सर बसर अंदाज़
तू हुआ जलवागर मुबारक हो
रेज़िश-ए-सिजदा-ए-जबीन-ए-न्याज़
मुझको पूछा तो कुछ ग़ज़ब न हुआ
मैं गरीब और तू ग़रीब नवाज़
असदुल्लाह ख़ां तमाम हुआ
ऐ दरेग़ा वह रिंद-ए-शाहिदबाज़
