न मैं हँसी न मैं रोई / गगन गिल
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रचनाकार: गगन गिल | |
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न मैं हँसी न मैं रोई
बीच चौराहे जा खड़ी होई
न मैं रूठी न मैं मानी
अपनी चुप से बांधी फाँसी
- ये धागा कैसा मैंने काता
- न इसे बांधा न उड़ाया
- ये सुई कैसे मैंने चुभोई
- न इसने सिली न उधेड़ी
- ये करवट कैसी मैंने ली
- साँस रुकी अब रुकी
- ये मैंने कैसी सीवन छेड़ी
- आँतें खुल-खुल बाहर आईं
जब न लिखा गया न बूझा
टंगड़ी दे ख़ुद को क्यों दबोचा
ये दुख कैसा मैंने पाला
इसमें अंधेरा न उजाला
