पुराने अवतरण Report a problem
पन्ना बदलें संवाद

पहला पानी / केदारनाथ अग्रवाल

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

कवि: केदारनाथ अग्रवाल

~*~*~*~*~*~*~*~

पहला पानी गिरा गगन से

उमँड़ा आतुर प्यार,

हवा हुई, ठंढे दिमाग के जैसे खुले विचार ।

भीगी भूमि-भवानी, भीगी समय-सिंह की देह,

भीगा अनभीगे अंगों की

अमराई का नेह

पात-पात की पाती भीगी-पेड़-पेड़ की डाल,

भीगी-भीगी बल खाती है

गैल-छैल की चाल ।

प्राण-प्राणमय हुआ परेवा,भीतर बैठा, जीव,

भोग रहा है

द्रवीभूत प्राकृत आनंद अतीव ।

रूप-सिंधु की

लहरें उठती,

खुल-खुल जाते अंग,

परस-परस

घुल-मिल जाते हैं

उनके-मेरे रंग ।

नाच-नाच

उठती है दामिने

चिहुँक-चिहुँक चहुँ ओर

वर्षा-मंगल की ऐसी है भीगी रसमय भोर ।

मैं भीगा,

मेरे भीतर का भीगा गंथिल ज्ञान,

भावों की भाषा गाती है

जग जीवन का गान ।

Rate this article:

Share this article:

Hubs Highlights International Sites Wikia messages
Entertainment
Gaming
Cartoons & Comics
Science Fiction
Hobbies
Sports
See all...
German
Spanish
Chinese
Japanese
More...
Wikia is hiring for several open positions
Send this article to a friend
"पहला पानी / केदारनाथ अग्रवाल"
 
 
Hi!

I thought you'd like this page from Wikia!

http://hi.literature.wikia.com

Come check it out!
Send confirmation


.