Fandom

Hindi Literature

प्यादे से वज़ीर / अमरनाथ श्रीवास्तव

१२,२६२pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share
http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

प्यादे से वज़ीर बनते हैं ऐसी बिछी बिसात

नये भोर का भ्रम देती है निखर गयी है रात


कई एक चेहरे, चेहरों के

त्रास औस संत्रास

भीतर तक भय से भर देते

हास और परिहास

नहीं बचा `साबुत' कद कोई ऐसा उपल निपात


बंद गली के सन्नाटों में

कोई दस्तक जैसी

भर देती हैं खालीपन से

बातें कैसी-कैसी

नयी-नयी अनुगूंजें बनते नये-नये अनुपात


लोककथायें जिनमें पीड़ा

का अनन्त विस्तार

हम ऐसे अभ्यस्त कि

खलता कोई भी निस्तार

बातों से बातें उठती हैं सब भूले औकात।

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

Also on Fandom

Random Wiki