पुराने अवतरण Report a problem
पन्ना बदलें संवाद

प्रयाणगीत / जयशंकर प्रसाद

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे!   दो वर्ष की उपलब्धियाँ    |     रचनाकारों की टिप्पणियाँ    |     अपनी टिप्पणी दीजिये


 रचनाकार: जयशंकर प्रसाद                 

हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती -
स्वयंप्रभा समुज्जवला स्वतंत्रता पुकारती -
अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़-प्रतिज्ञ सोच लो,
प्रशस्त पुण्य पंथ हैं - बढ़े चलो बढ़े चलो।

असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्य दाह-सी।
सपूत मातृभूमि के रुको न शूर साहसी।
अराति सैन्य सिंधु में - सुबाड़वाग्नि से जलो,
प्रवीर हो जयी बनो - बढ़े चलो बढ़े चलो।

Rate this article:

Share this article:

Hubs Highlights International Sites Wikia messages
Entertainment
Gaming
Cartoons & Comics
Science Fiction
Hobbies
Sports
See all...
German
Spanish
Chinese
Japanese
More...
Wikia is hiring for several open positions
Send this article to a friend
"प्रयाणगीत / जयशंकर प्रसाद"
 
 
Hi!

I thought you'd like this page from Wikia!

http://hi.literature.wikia.com

Come check it out!
Send confirmation


.