Fandom

Hindi Literature

प्रियतम बिन जीऊँ कैसे / तारा सिंह

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

रचनाकार: तारा सिंह

~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*

मैं जिस प्रियतम को अपनी पलकों पर
बिठाकर रखती आई, सयत्न
आज आयेंगे वो, इसमें जरा भी नहीं वहम
तन कुसुम विकसित होने लगा है
लगता है, आ रहा हो बसंत
प्रियतम बिना यह मेरा कोमल तन
कितना – कितना सहा है ताप
कितना – कितना किया उपवास
इसे जानता है, अंतर्यामी
और जानती हूँ, मैं आप
मुझ पर निर्लज्जता का मत लगाओ कलंक
बल्कि विरह सिंधु को पकड़ जीऊँ कैसे
बतला दो जीने का ऐसा कोई ढ़ंग
मैं कैसे भूल जाऊँ, उस प्रियतम को
जो अब बन गया है, मेरे तन का अंग
इस अबोध प्राण को बतलाओ
प्रियतम बिन जीवित रखूँ कैसे
आँधी, वर्षा, ताप, तुषार - पात
यौवन धन का अमूल्य उपहार
प्रियतम बिना संभालू कैसे
चंद्रमा की मधुर ज्योत्सना में घुलकर ही
रजनी होती है इतनी रहस्यमयी
खीचकर रसातल से रस को, पेड़–पौधे रहते हरे
मैं अपने चाँद- निधि को पाने
कब तक यूँ बैठकर रहूँ, रोती

Also on Fandom

Random Wiki