पुराने अवतरण Report a problem
पन्ना बदलें संवाद

फ़िर उठा तलवार / रांगेय राघव

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे!   दो वर्ष की उपलब्धियाँ    |     रचनाकारों की टिप्पणियाँ    |     अपनी टिप्पणी दीजिये


 रचनाकार: रांगेय राघव                 

एक नंगा वृद्ध
जिसका नाम लेकर मुक्त होने को उठा मिल हिंद
कांपते थे सिंधु औ साम्राज्य
सिर झुकाते थे सितमगर त्रस्त
आज वह है बंद
मेरे देश हिन्दुस्तान
बर्बर आ रहा है जापान, जागो जिन्दगी की शान ।

अरे हिन्दी ! कौन कहता हा की तू है रुद्ध
कर न पाएगा भयंकर युद्ध
युद्ध ही है आज सत्ता, आज जीवन ।

देश,
संगठन कर ,जातियों की लहर मिलकर
तू भयानक सिंधु
राष्ट्र रक्षा के लिए जो धीर
फ़िर उठा ले आज
संस्कृति की पुरानी लाज से
भीगी हुई तलवार ।

Rate this article:

Share this article:

Hubs Highlights International Sites Wikia messages
Entertainment
Gaming
Cartoons & Comics
Science Fiction
Hobbies
Sports
See all...
German
Spanish
Chinese
Japanese
More...
Wikia is hiring for several open positions
Send this article to a friend
"फ़िर उठा तलवार / रांगेय राघव"
 
 
Hi!

I thought you'd like this page from Wikia!

http://hi.literature.wikia.com

Come check it out!
Send confirmation


.