फ़िल्मों के लिए लिखे गीत-2 /शैलेन्द्र
From Hindi Literature
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रचनाकार: शैलेन्द्र | |
| फ़िल्मों के लिए लिखे गीत-2 | |
| रचनाकार: | शैलेन्द्र |
| प्रकाशक: | -- |
| वर्ष: | -- |
| भाषा: | हिन्दी |
| विषय: | गीत-संग्रह |
| शैली: | -- |
| पृष्ठ संख्या: | 72 |
| ISBN: | -- |
| विविध: | कुल 60 गीतों का संग्रह |
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इस पन्ने पर दी गयी रचनाओं को विश्व भर के योगदानकर्ताओं ने भिन्न-भिन्न स्रोतों का प्रयोग कर कविता कोश में संकलित किया है। ऊपर दी गयी प्रकाशक संबंधी जानकारी प्रिंटेड पुस्तक खरीदने में आपकी सहायता के लिये दी गयी है। | |
- नींद परी लोरी गाए, माँ झुलाए पालना / शैलेन्द्र
- नैनों में सावन, मन मेरे फागुन / शैलेन्द्र
- आ रे भँवरे आ, महके मेरी मन की बगिया / शैलेन्द्र
- मेरे दिल की धड़कन क्या बोले / शैलेन्द्र
- ऊँच-नीच का भेद मिटाकर गले मिले सारे इन्सान / शैलेन्द्र
- जाने कैसे सपनों में खो गई अँखियाँ / शैलेन्द्र
- साथ हो तुम और रात जवाँ / शैलेन्द्र
- आ जा री आ निंदिया तू आ / शैलेन्द्र
- हरियाला सावन ढोल बजाता आया रे / शैलेन्द्र
- हम आपकी महफ़िल में भूले से चले आए / शैलेन्द्र
- फिर वो भूली-सी याद आई / शैलेन्द्र
- एक हसीं शाम को दिल मेरा खो गया / शैलेन्द्र
- बड़े भोले हो हँसते हो सुनके दुहाई / शैलेन्द्र
- दुआ कर ग़म-ए-दिल, ख़ुदा से दुआ कर / शैलेन्द्र
- आ जा अब तो आ जा / शैलेन्द्र
- प्यार में मिलन, सनम, होता है तक़दीर से / शैलेन्द्र
- आई हूँ बड़ी आस लिए तिहारी / शैलेन्द्र
- एक नया दौर दुनिया में शुरू बच्चों के क़दम से होगा / शैलेन्द्र
- ये चमन हमारा अपना है, इस देश पे हमको नाज है / शैलेन्द्र
- मतवाली आँखों वाले,ओ अलबेले दिलवाले / शैलेन्द्र
- इलाही तू सुन ले हमारी दुआ, हमें सिर्फ़ एक आसरा है तेरा / शैलेन्द्र
- घर आ जा, घिर आए बदरा साँवरिया / शैलेन्द्र
- नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए / शैलेन्द्र
- बता दे कोई कौन गली गए श्याम / शैलेन्द्र
- झूमती चली हवा याद आ गया कोई / शैलेन्द्र
- ले जा अपनी याद भी ले जा अब तो हो गई प्रीत पराई / शैलेन्द्र
- देश की धरती ने ललकारा / शैलेन्द्र
- मोरे नैहर का मोह बड़ा, प्रीत बड़ी ससुराल की / शैलेन्द्र
- आज़ाद गगन, आज़ाद पवन, आज़ाद हुई धरती अपनी / शैलेन्द्र
- बदलेगी ये दुनिया एक दिन बदलेगी / शैलेन्द्र
- दो नैनों ने जाल बिछाए और दो नैना उलझ गए / शैलेन्द्र
- तेरी बदली हुई बेदर्द नज़र याद आई / शैलेन्द्र
- मिलजुल के काटो लोगो, दुख-सुख बाँटो रे / शैलेन्द्र
- मुरलिया काहे बजाई बिन सुने रहा नहिं जाई / शैलेन्द्र
- फूल चुन ले मेरे बाल्म कि जाने कब डाल झुके / शैलेन्द्र
- मुझ को तुम जो मिले सारा जहाँ मिल गया / शैलेन्द्र
- कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन /शैलेन्द्र
