फिर सावन रुत की पवन चली / नासिर काज़मी
From Hindi Literature
|
कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे! दो वर्ष की उपलब्धियाँ | रचनाकारों की टिप्पणियाँ | अपनी टिप्पणी दीजिये
|
|
रचनाकार: नासिर काज़मी | |
फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आये
फिर पत्तों की पाज़ेब बजी तुम याद आये
फिर कुँजें बोलीं घास के हरे समन्दर में
रुत आई पीले फूलों की तुम याद आये
फिर कागा बोला घर के सूने आँगन में
फिर अम्रत रस की बूँद पड़ी तुम याद आये
पहले तो मैं चीख़ के रोया और फिर हँसने लगा
बादल गर्जा बिजली चमकी तुम याद आये
दिन भर तो मैं दुनिया के धन्धों में खोया रहा
जब दीवारों से धूप ढली तुम याद आये
