Hindi Literature

फुरसत से घर में आना तुम / भावना कुँअर

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रचनाकार: भावना कुँअर


फुरसत से घर में आना तुम

और आके फिर ना जाना तुम ।

मन तितली बनकर डोल रहा

बन फूल वहीं बस जाना तुम ।

अधरों में अब है प्यास जगी

बनके झरना बह जाना तुम ।

बेरंग हुए इन हाथों में

बनके मेंहदी रच जाना तुम ।

नैनों में है जो सूनापन

बन के काज़ल सज जाना तुम।

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