Fandom

Hindi Literature

बस इतना--अब चलना होगा / भगवतीचरण वर्मा

१२,२६१pages on
this wiki
Add New Page
Talk0 Share

Ad blocker interference detected!


Wikia is a free-to-use site that makes money from advertising. We have a modified experience for viewers using ad blockers

Wikia is not accessible if you’ve made further modifications. Remove the custom ad blocker rule(s) and the page will load as expected.

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng.png
































CHANDER

बस इतना--अब चलना होगा

फिर अपनी-अपनी राह हमें ।


कल ले आई थी खींच, आज

ले चली खींचकर चाह हमें

तुम जान न पाईं मुझे, और

तुम मेरे लिए पहेली थीं;

पर इसका दुख क्या? मिल न सकी

प्रिय जब अपनी ही थाह हमें ।


तुम मुझे भिखारी समझें थीं,

मैंने समझा अधिकार मुझे

तुम आत्म-समर्पण से सिहरीं,

था बना वही तो प्यार मुझे ।


तुम लोक-लाज की चेरी थीं,

मैं अपना ही दीवाना था

ले चलीं पराजय तुम हँसकर,

दे चलीं विजय का भार मुझे ।


सुख से वंचित कर गया सुमुखि,

वह अपना ही अभिमान तुम्हें

अभिशाप बन गया अपना ही

अपनी ममता का ज्ञान तुम्हें

तुम बुरा न मानो, सच कह दूँ,

तुम समझ न पाईं जीवन को

जन-रव के स्वर में भूल गया

अपने प्राणों का गान तुम्हें ।


था प्रेम किया हमने-तुमने

इतना कर लेना याद प्रिये,

बस फिर कर देना वहीं क्षमा

यह पल-भर का उन्माद प्रिये।

फिर मिलना होगा या कि नहीं

हँसकर तो दे लो आज विदा

तुम जहाँ रहो, आबाद रहो,

यह मेरा आशीर्वाद प्रिये ।

Also on Fandom

Random Wiki