बादबाँ खुलने से पहले का / परवीन शाकिर
From Hindi Literature
|
कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे! दो वर्ष की उपलब्धियाँ | रचनाकारों की टिप्पणियाँ | अपनी टिप्पणी दीजिये
|
रचनाकार: परवीन शाकिर
~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~*~
बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखना
मैं समन्दर देखती हूँ तुम किनारा देखना
यूँ बिछड़ना भी बहुत आसाँ न था उस से मगर
जाते जाते उस का वो मुड़ के दुबारा देखना
किस शबाहत को लिये आया है दरवाज़े पे चाँद
ऐ शब-ए-हिज्राँ ज़रा अपना सितारा देखना
आईने की आँख ही कुछ कम न थी मेरे लिये
जाने अब क्या क्या दिखायेगा तुम्हारा देखना
श्रेणियाँ: कविताएँ | गज़ल | परवीन शाकिर
