पुराने अवतरण Report a problem
पन्ना बदलें संवाद

बाल कविताएँ / भाग २ / रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

From Hindi Literature

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

कविता कोश की स्थापना के दो वर्ष पूरे!   दो वर्ष की उपलब्धियाँ    |     रचनाकारों की टिप्पणियाँ    |     अपनी टिप्पणी दीजिये


 रचनाकार: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'                 

चाचा जी का बन्दर
चाचा जी ने पाला बन्दर ।

करता है वह खों-खों दिन भर।

जहाँ कहीं शीशा पा जाता

दाँत दिखाता मुँह बिचकाता

आँगन के पेड़ों पर चढ़ता ।

फल तोड़ता ऊधम मचाता।


तारे
आसमान की चादर ताने

बिखरे टिमटिम-झिलमिल तारे।

जैसे फूल खिले बगिया में

वैसे खिलते हैं ये सारे ।

सब सो जाते हैं जब थककर

ओस तभी बिखराते तारे।

हुआ सवेरा सूरज निकला

चुपके-से खो जाते सारे।


तितली रानी
---
तितली रानी तितली

कौन देश से आई हो ।

रंग- बिरंगे सुन्दर कपड़े

किस दूकान से लाई हो ?

फूल-फूल पर घूमा करती

सबके मन को भाई हो।


नन्हीं चींटी
कभी न थकती चलती रहती

नन्हीं चींटी ।

गरमी से घबराना कैसा

सरदी में रुक जाना कैसा

भूख- प्यास सब कुछ है सहती

नन्हीं चींटी ।

सीखो सदा प्रेम से रहना

हँसकर दुख सुख सारे सहना

‘मेहनत करके जिओ’-कहती

नन्हीं चींटी ।


मुर्गा बोला
मुर्गा बोला ­कुकुड़ू कूँ

जाग उठा , सोता तू ।

सूरज भी अब जाग गया

दूर अँधेरा भाग गया ।

बिस्तर छोड़ो उठ जाओ

मुँह धोकर बाहर आओ।

Rate this article:

Share this article:

Hubs Highlights International Sites Wikia messages
Entertainment
Gaming
Cartoons & Comics
Science Fiction
Hobbies
Sports
See all...
German
Spanish
Chinese
Japanese
More...
Wikia is hiring for several open positions
Send this article to a friend
"बाल कविताएँ / भाग २ / रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'"
 
 
Hi!

I thought you'd like this page from Wikia!

http://hi.literature.wikia.com

Come check it out!
Send confirmation


.