FANDOM

१२,२७० Pages

http://www.kavitakosh.orgKkmsgchng
































CHANDER

बिनु गोपाल बैरिन भई कुंजैं।

तब ये लता लगति अति सीतल¸ अब भई विषम ज्वाल की पुंजैं।

बृथा बहति जमुना¸ खग बोलत¸ बृथा कमल फूलैं अलि गुंजैं।

पवन¸ पानी¸ धनसार¸ संजीवनि दधिसुत किरनभानु भई भुंजैं।

ये ऊधो कहियो माधव सों¸ बिरह करद करि मारत लुंजैं।

सूरदास प्रभु को मग जोवत¸ अंखियां भई बरन ज्यौं गुजैं।