बूढ़ा मलबा / निदा फ़ाज़ली
From Hindi Literature
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रचनाकार: निदा फ़ाज़ली | |
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संग्रह का मुखपृष्ठ: आँखों भर आकाश / निदा फ़ाज़ली |
हर माँ
अपनी कोख से
अपने शौहर को जन्मा करती है
मैं भी अब
अपने कन्धों से
बूढ़े मलवे को ढो-ढो कर
थक जाऊँगा
अपनी महबूबा के
कुँवारे गर्भ में
छुप कर सो जाऊँगा।
