भिक्षुक दुख / केदारनाथ अग्रवाल
From Hindi Literature
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रचनाकार: केदारनाथ अग्रवाल | |
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संग्रह का मुखपृष्ठ: फूल नहीं, रंग बोलते हैं-1 / केदारनाथ अग्रवाल |
मैंने सोख लिए हैं
और पिए हैं
बेला औ' चम्पा गुलाब के
डब-डब आँसू,
मौलसिरी के
छल-छल आँसू,
जैसे सूरज पी लेता है
हरी घास के लक-दक आँसू !
मेरा दुख
भिक्षुक है मेरा ;
वह जो लेता है
देता हूँ ;
जाता है जब
तब मैं उससे
आने का
वादा लेता हूँ
